विश्व मधुमेह दिवस‘ के अवसर पर स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम, दिनांक 14 नवम्बर 2024
दिनांक 14 नवम्बर 2024 को ‘विश्व मधुमेह दिवस‘ के अवसर पर एक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम विश्वविद्यालय परिसर की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाईयों एवं ‘प्रयत्न‘ संस्था द्वारा विश्वविद्यालय परिसर स्थित सीनेट हाल में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन विशिष्ट अतिथि प्रति कुलपति प्रो0 सुधीर कुमार अवस्थी, विशिष्ट वक्ता, प्रो0 एस.के. गौतम, प्रोफेसर, मेडिसिन विभाग, जी.एस.वी.एम. मेडिकल कालेज, कानपुर, विशिष्ट वक्ता डा0 रवि कुमार, वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ, कानपुर, कुलसचिव डॉ0 अनिल कुमार यादव, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो0 नीरज कुमार सिंह एवं समन्वयक, राष्ट्रीय सेवा योजना डॉ0 श्याम मिश्रा द्वारा दीप प्रज्जवलन से हुआ। विशिष्ट अतिथि प्रति कुलपति प्रो0 सुधीर कुमार अवस्थी ने अपने उद्बोधन में कहा कि डायबिटीज के बारे में जानने की सभी को आवश्यकता है। युवा वर्ग का जागरूक होना अत्यन्त आवश्यक है क्योंकि Type-2 Diabetes Mellitus असंतुलित जीवनशैली के कारण भी होती है। मधुमेह के बारे में बहुत सी भ्रान्तियाँ है। इन भ्रान्तियों को दूर करने की आवश्यकता है जिससे कि मधुमेह के मरीज उचित उपचार एवं उचित जीवनशैली अपनाकर स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। विशिष्ट वक्ता प्रो0 एस.के. गौतम, प्रोफेसर, मेडिसिन विभाग, जी.एस.वी.एम. मेडिकल कालेज, कानपुर ने ‘डायबिटीज एवं स्वस्थ जीवन‘ विषय व्याख्यान प्रस्तुत करते हुये कहा कि पूरे विश्व में The IDF Diabetes Atlas 10th edition 2021 के अनुसार 20 से 64 वर्ष तक के 53.70 करोड़ व्यक्ति डायबिटीज से पीड़ित है। 2030 तक यह संख्या 64.30 करोड़ होने की संभावना है। भारतवष में डायबिटीज की चर्चा करते हुये उन्होंने बताया की डायबिटीज से ग्रसित रोगियों की संख्या के आधार पर भारत विश्व में द्वितीय स्थान पर है। प्रथम स्थान चीन का है। उन्होंने बताया कि भारत में 11.4 प्रतिशत (10.1 करोड़) जनसंख्या डायबिटीज से ग्रसित है। यदि भारत में डायबिटीज रोगियों की संख्या इसी प्रकार बढ़ती रही तो कुछ वर्षों बाद भारत डायबिटीज रोगियों में प्रथम स्थान पर होगा। डायबिटीज के प्रकार के संबंध में उन्होंने बताया Type- 1 Diabetes Mellitus से 5 से 10 प्रतिशत एवं Type-2 Diabetes Mellitus से 90 से 95 प्रतिशत मरीज ग्रसित होते है। Type-2 Diabetes Mellitus के कारणों के संबंध में उन्होंने बताया कि Modifiable- मोटापा अधिक वजन कम शारीरिक गतिविधि असंतुलित आहार प्रीडायबिटीज सामान्य रक्त शर्करा से अधिक लेकिन टाइप 2 मधुमेह होने के लिए पर्याप्त नहीं Non-Modifiable- मधुमेह का पारिवारिक इतिहास 45 वर्ष से अधिक साउथ एशियन, अफ्रीकन हिस्पैनिक एथिनीसिटी जन्म के समय कम वजन गर्भकालीन रोगों के साथ पिछली गर्भावस्था पी.सी.ओ.एस. का इतिहास या अन्य मेटाबोलिक रोग उन्होंने कहा कि भारतीयों में डायबिटीज अधिक होने का कारण आहार में Carbohydrates का अधिक होना और आहार का अधिक ग्लाइसीमिक इन्डेक्स का होना है। भारत में चावल या उससे बने प्रदार्थ में 78 प्रतिशत Carbohydrates होता है जो पूरे देश में खाया जाता है। उन्होंने डायबिटीज के मैनेजमेंट हेतु आहार, मेडिकेशन एवं व्यायाम के त्रिकोण के संबंध में बताया। उन्होंने आहार मैनेजमेंट के संबंध में कहा कि आधी प्लेट रंगीन (हरी सब्जियां इत्यादि), एक क्वार्टर प्लेट में प्रोटीन वाला एवं एक क्वार्टर प्लेट में होल ग्रेन वाले Starchy वेजीटेबल होना चाहिये। Diabetes Mellitus के संबंध में उन्होंने सारांश में कहा कि यह इलाज योग्य लेकिन समाप्त होने योग्य नहीं हैं। मोटापा कम करके, उचित जीवनशैली अपनाकर इसको नियंत्रित कर सकते हैं। विशिष्ट वक्ता डा0 रवि कुमार, वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ, कानपुर ने ‘मधुमेह के मनोवैज्ञानिक पहलू‘ विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत करते हुये कहा मधुमेह का मनोवैज्ञानिक पहलू भावनात्मक, संज्ञानात्मक और मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों की श्रेणी को संदर्भित करता है जो मधुमेह वाले लोग आमतौर पर अनुभव करते हैं, मधुमेह के साथ रहना भावनात्मक रूप से कठिन हो सकता है, मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है और बदले में, मधुमेह प्रबंधन को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने बताया मधुमेह संकट (Diabetes Distress) के बारे में बताया कि- Diabetes Distress परिभाषा- मधुमेह के साथ रहने और उसके प्रबंधन के लिए विशिष्ट भावनात्मक बोझ और चिंता है, जो सामान्य तनाव या चिंता से अलग है। कारण- निरंतर निगरानी की आवश्यकता, आहार प्रतिबंध, जटिलताओं का डर और ग्लूकोज के स्तर पर चिंता भारी पड़ सकती है। व्यापक्ता- शोध से पता चलता है कि मधुमेह से पीड़ित 18-45 प्रतिशत लोगों को किसी न किसी रूप में मधुमेह की परेशानी का अनुभव करते हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने की क्षमता प्रभावित होती है। उन्होंने अवसाद एवं मधुमेह के बारे में मधुमेह के रोगियों में अवसाद (Depression) की व्यापकता अधिक है, और अक्सर मधुमेह रहित लोगों में अवसाद की व्यापकता दोगुनी होती है, उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय मधुमेह प्रबंधन अभ्यास अध्ययन टाइप 1 मधुमेह वाले 30.7 प्रतिशत रोगियों और टाइप 2 मधुमेह वाले 33.1 प्रतिशत रोगियों ने अवसादग्रस्तता के लक्षणों की सूचना दी। मधुमेह और चिंता के विषय में उन्होंने कहा कि सामान्य चिंता- किसी पुरानी बीमारी के प्रबंधन की मांग, जटिलताओं का डर और रक्त शर्करा के स्तर में उतार-चढ़ाव के बारे में चिंता सामान्यीकृत चिंता का कारण बन सकती है। विशिष्ट भय- मधुमेह वाले लोग, विशेष रूप से जो इंसुलिन लेते हैं, उनमें हाइपोग्लाइसीमिया (कम रक्त शर्करा एपिसोड) का डर विकसित हो सकता है, जो व्यवहार को प्रभावित कर सकता है। यह डर ‘‘अति-निगरानी‘‘ और यहां तक कि आवश्यक उपचार से बचने का कारण बन सकता है। व्यवहारिक प्रभाव- चिंता के कारण लोग उन स्थितियों से बच सकते हैं जो रक्त शर्करा नियंत्रण को जटिल बना सकती हैं, जैसे कि अनियमित भोजन के साथ सामाजिक मेलजोल, जिससे जीवन की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। समग्र मधुमेह देखभाल एक समग्र दृष्टिकोण जो शारीरिक और मनोवैज्ञानिक दोनों प्रकार की सहायता को एकीकृत करता है, इष्टतम मधुमेह प्रबंधन के लिए आवश्यक है। शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने से मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए बेहतर आत्म-प्रबंधन, कम जटिलताएँ और जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार हो सकता है। इस कार्यक्रम में शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने प्रश्न भी पूछें। डॉ0 पंकज द्विवेदी ने पूछां कि जिनकी फैमिली हिस्ट्री डायबिटीज की है क्या उनकों डायबिटीज हो ही जायेगी? - डा0 एस.के गौतम ने बताया कि डायबिटीज होने के बहुत से कारण है। जिनकी फैमिली हिस्ट्री डायबिटीज की है उनको डायबिटीज हो सकती है लेकिन लाइफस्टाइल मोडिफिकेशन से इस बीमारी से बचा जा सकता है। डॉ0 नीरज कुमार सिंह ने पूछां कि छोटे बच्चों में डायबिटीज पायी जा रही है इसका क्या कारण है? - डा0 एस.के गौतम ने बताया कि बच्चों में होने वाली डायबिटीज Type- 1 Diabetes Mellitus है जो कि शरीर में Insulin न बनने के कारण होती है। कुलसचिव डॉ0 अनिल कुमार यादव ने पूछां कि क्या डायबिटीज के कारण स्लीप डिस्ओडर हो सकते है। - डॉ0 रवि कुमार ने बताया कि डायबिटीज के कारण एंजाइटी एवं डिप्रेशन हो जाता है जिसके कारण स्लीप डिस्टरबैंसस हो सकते हैं। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अधिकारियों/कर्मचारियों/विद्यार्थियों रैंडम ने ब्लड शुगर की जांच निःशुल्क करायी (कुल संख्या- 221)। यह निःशुल्क जांच फार्मोला कंपनी के सहयोग से करायी गयी। प्रति कुलपति जी द्वारा विशिष्ट वक्ता प्रो0 एस.के. गौतम, प्रोफेसर, मेडिसिन विभाग, जी.एस.वी.एम. मेडिकल कालेज, कानपुर एवं विशिष्ट वक्ता डा0 रवि कुमार, वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ, कानपुर को स्मृति चिह्न भेंट किया गया। धन्यवाद ज्ञापन विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ0 अनिल कुमार यादव ने किया। कार्यक्रम का संयोजन उप-समन्वयक, राष्ट्रीय सेवा योजना एवं कुलानुशासक डा0 प्रवीन कटियार ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना के विश्वविद्यालय परिसर की इकाईयों के कार्यक्रम अधिकारी डॉ0 मानस उपाध्याय, डॉ0 पंकज द्विवेदी, डॉ0 स्नेह पांडे, डॉ0 पुष्पा ममोरिया संकाय सदस्य डॉ0 अनुराधा कालानी, डॉ0 अजय कुमार गुप्ता, डॉ0 योगेन्द्र पाण्डेय एवं डॉ0 ओमशंकर गुप्ता आदि तथा विभिन्न संस्थानों के विद्यार्थी एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक उपस्थित थे।