बकेवर, इटावा। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जनता कॉलेज, बकेवर की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा एक ऑनलाइन जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन कॉलेज के प्राचार्य प्रो. राजेश किशोर त्रिपाठी के दिशा निर्देशन में किया गया। कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. मनोज कुमार यादव ने किया। संगोष्ठी में 55 स्वयंसेवकों ने सहभागिता कर पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। अपने संबोधन में प्राचार्य प्रो. राजेश किशोर त्रिपाठी ने विश्व पर्यावरण दिवस के महत्व, उद्देश्य तथा वर्तमान वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस प्रतिवर्ष 5 जून को मनाया जाता है और इसकी शुरुआत वर्ष 1972 में आयोजित United Nations Conference on the Human Environment के निर्णय के बाद हुई थी। उन्होंने कहा कि आज पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता के ह्रास, वायु एवं जल प्रदूषण तथा प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है।
कार्यक्रम अधिकारी डॉ. मनोज यादव ने विभिन्न आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया कि संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों के अनुसार विश्व में प्रतिवर्ष लगभग एक करोड़ हेक्टेयर वन क्षेत्र नष्ट हो रहा है तथा जलवायु परिवर्तन के कारण वैश्विक तापमान लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार वायु प्रदूषण के कारण प्रतिवर्ष लाखों लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। भारत सहित अनेक देशों में बढ़ता तापमान, अनियमित वर्षा, सूखा, बाढ़ तथा अन्य प्राकृतिक आपदाएँ पर्यावरणीय असंतुलन के स्पष्ट संकेत हैं। उन्होंने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवनकाल में कम से कम 10 वृक्ष लगाकर उनका संरक्षण करे, जल एवं ऊर्जा का विवेकपूर्ण उपयोग करे तथा एकल-उपयोग प्लास्टिक के प्रयोग को कम करे, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि एक परिपक्व वृक्ष प्रतिवर्ष लगभग 20 से 22 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर वातावरण को शुद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए वृक्षारोपण केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित करने का माध्यम है। डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों की भूमिका केवल सेवा कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें समाज में पर्यावरणीय जागरूकता के दूत के रूप में कार्य करना चाहिए। उन्होंने स्वयंसेवकों से अपने गांव, मोहल्ले एवं शैक्षणिक संस्थानों में पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, जल संरक्षण तथा वृक्षारोपण के प्रति जन-जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक दिव्यांश मिश्रा, सुन्दरम भट्ट, साधना गौतम सहित कुल 55 स्वयंसेवक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण तथा स्वच्छ एवं हरित भारत के निर्माण हेतु सक्रिय योगदान देने की शपथ ली। संगोष्ठी का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि “प्रकृति का संरक्षण ही मानव सभ्यता के सुरक्षित भविष्य की आधारशिला है, और पर्यावरण बचाना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।”
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